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देशबन्धु ज्ञान मंच-21
नो मास्क नो सर्विस पालिसी किस देश में शुरू की गई थी?

नेपाल
भारत
बांग्लादेश
पकिस्तान

नाम :

जिला:

आयु :

मोबा :


देशबन्धु ज्ञान मंच-20 के सही उत्तर देने वाले पाठक
परख पाठक, योगेश विश्वकर्मा, वर्षा विश्वकर्मा, जगदीश बोनिया, आस्था, विकास कुमार जैन, गीता रैकवार, रविशंकर रैकवार, विनोद जैन, वर्षा जैन, राजेंद्र प्रकाश त्रिवेदी, अंश, शुभांजलि, योगेश रैकवार, मो शोएब खान
कंप्यूटर द्वारा चयनित विजेता
विकास कुमार जैन, वर्षा विश्वकर्मा, शुभांजलि

१ प्रत्येक प्रश्न १० अंकों का है
२ आपका उत्तर आपके मोबाइल नंबर के साथ स्टोर किया जायेगा
३ सोमवार से शनिवार तक आपको ६ प्रश्नों के उत्तर देने होंगे
४ रविवार को आपके अंकों का योग किया जाएगा
५ अधिकतम अंक पाने वाले को आकर्षक पुरस्कार दिया जायेगा
६ पुरस्कार आपको देशबन्धु के कार्यालय से एक सप्ताह के अंदर आकर लेना होगा
७ एक से अधिक अधिकतम अंक पाने पर कंप्यूटर द्वारा विजेता का चयन होगा
८ सभी सही उत्तर वालों के नाम देशबन्धु के ई-संस्करण पर दिखाए जायेंगे
९ देशबन्धु का निर्णय अंतिम और मान्य होगा
१० देशबन्धु ज्ञानमंच के रात्रि १२ बजे के पहले दिए गए उत्तर ही मान्य होंगें।
देशबन्धु जनमत संग्रह
क्या विधायकों के दलबदल और खरीद फरोख्त की ख़बरों की पुष्टि के लिए जाँच होनी चाहिए?









सत्ता में दलबदल एक ऐसी व्यस्वस्था है जो जनता के सामने चुनाव प्रक्रिया को ठेंगा दिखती नजर आती है। एक दल उसे ह्रदय परिवर्तन कहता है तो दूसरा उसे खरीद-फरोख्त की संज्ञा देता है। इन प्रबल उद्घोषणाओं के बीच मतदाता ठगा सा अनुभव करता है। इस तरह होने वाले दलबदल और खरीद-फरोख्त की ख़बरों की पुष्टि के लिए क्या जांच होनी चाहिए या नहीं।
आपकी क्या राय है ?

विगत सर्वे का परिणाम

अध्ययन सामग्री पर इंटरनेट के प्रभाव के विषय में किये गए जनमत संग्रह "क्या इंटरनेट पर हर विषय पर जानकारी की उपलब्धता के कारण पेपर पर प्रिंट किताबें लुप्त हो जाएंगी?" पर पाठकों में स्पष्ट राय है। ३५% से अधिक का मत है कि पुस्तकें लुप्त हो जाएंगी क्योंकि इंटरनेट पर जानकारी नवीनतम होती है जबकि १७% का मानना है कि पुस्तकें ही सही होती हैं और उनकी लुप्त होने के कोई सम्भावना नहीं है। ४७% का कहना है कि दोनों का अपना अलग अलग महत्त्व है और भविष्य में भी साथ साथ बानी रहेंगी।


विशेषज्ञ की राय

आज कौन दवात-कलम से लिखता है? कहाँ है स्लेट पट्टी? किधर हैं रथ और हाथी? और आपको याद है पहले त्वरित सुचना के लिए तार या टेलीग्राम दिया जाता था? आज सहजता से मोबाइल का उपयोग करने वालों में किसी को पेजर याद है क्या? क्या हम आज भी फिल्म डेवेलप करवा कर फोटो प्रिंट करवा रहे हैं? नहीं ! ठीक इस तरह ही पुस्तकें भी विलुप्त हो जाएंगी। सिर्फ समारोह की शोभा या संग्राहलयों की शान बन कर रह जाएंगी। इसमें कोई दो मत हो ही नहीं सकते। जैसे सड़क से भाफ से चलने वाली गाड़िया आज नहीं हैं और हमें मालूम है पेट्रोल और डीजल से चलने वाली गाड़ियों को जल्द ही बैटरी से चलने वाली गाड़ियां विस्थापित करने वाली हैं वैसे ही आने वाले समय में पुस्तकें लुप्त हो जाएंगी और इंटरनेट आधारित जानकारी ही एकमात्र पाठ्य सामग्री रह जाएगी। आई एस रुपराह, जबलुपर

पाठकों की कलम से.....

आपने "अंगदान" के रूप में एक बहुत ही ज्वलंत मुद्दा उठाया है। इस पर ८१ प्रतिशत लोगों का सकारात्मक मत एक अत्यंत सन्तोषजक बात है। आशा है भविष्य में अंगदान करने वालों के संख्या भी बढ़ेगी।
राज, जबलपुर

वर्गीकृत विज्ञापन का आईडिया अच्छा है। मनचाहे आइटम को सेलेक्ट कर के देखने की सुविधा बहुत उपयोगी है। अभी विज्ञापन बहुत कम हैं आशा करता हूँ भविष्य में काफी होंगे। क्या ये विज्ञापन पेपर में भी छप सकते हैं। राकेश गुप्ता, जबलपुर

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